Saturday, 28 February 2015

लघुकथा :- डिस्टेंस रिलेशनशिप
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बीमार पड़ी माँ को हस्पताल में अचानक खून की आवश्यकता पड़ने पर घर के सभी सदस्य कोई न कोई बहाना बना कर किनारा कर लिया, आपस की खुसर पुसर सुन रही एक लड़की उठी और अपना रक्त दान कर आती है । खून निकालने वाली नर्स ने 
जब लड़की से उसका बीमार महिला से सम्बन्ध पूछा तो उसने कहा डिस्टेंस रिलेशन ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
28/02/2015


लघुकथा :- धोखा पार्ट (3)
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चौदह साल की उम्र और चौदहवीं का चाँद थी वह। चौधरी साहब की कोठी मे वह पहली बार उनके जन्मदिन के अवसर पर अपने बाप के साथ गई थी जो चौधरी के वहां खानसामा था ।

पहली ही नजर में कच्ची कली पैंसठ वर्षीय विधुर,निःसंतान चौधरी को भा गई थी। उम्र के आखिरी पड़ाव पर उनके अंदर जीनत को अपनी दुल्हन बनाने की लालसा बलवती होने लगी थी ।

एक दिन चौधरी ने सुबह सुबह उसके अब्बू इमरान को बुलवाया और अपनी मंशा जाहिर करते हुए उसे ढेर सारा धन देने का लालच दिया। पहले तो इमरान ना नुकुर करता रहा पर जब चौधरी ने उससे वादा किया कि इस पूरी जायदाद की इकलौती वारिस होगी उसकी बेटी और उससे होने वाली औलादें होंगी ।
आखिर वह समय आ गया जब जीनत और चौधरी की शादी हो गई। और सुहाग रात के दिन ही चौधरी साहब को दिल का दौरा पड़ा और वह जन्नत नसीन हो गए ।
अब उनकी जगह जीनत और खानसामा बाप उस कोठी के मालिक थे । सही भी है ऊपर वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
01/03/2015



लघु कथा :- मोह माया
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बाबा इतनी दौलत जोड़े हो किसके लिये इकलौता बेटा है । काहे इसके नाम नहीं कर देतो हो डॉक्टर साहब बोले । अरे डॉक्टर साब आप क्या जानो जब आप हमारी उम्र के होंगे तब समझेगे । डॉक्टर बाबू ई मोह माया ना है अभी जो बचवा बहु हमारी देखभाल कर रहें हैं ना जहां इस नालायक के नाम कर दी उस दिन तो हम गये काम से...आपने डॉक्टर साब बागबान पिक्चर देखे हैं बच्चनवा की । बेटा बाप बाप बेटे को और डॉक्टर उन दोनों को निरुत्तर देख रहा था ।

(पंकज जोशी ) ) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
01/03/2015


लघुकथा :- दोहरा चरित्र
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अपनी फ़िल्म "दोहरा चरित्र" के प्रमोशन के लिये सड़कों पर उतरे अभिनेता , अभिनेत्री और निर्देशक ने दिनभर बड़े जोशोखरोशो के साथ रोड शो करने के बाद शाम को एक पांच सितारा होटल में प्रेस वार्ता में पत्रकारों के साथ रूबरों हो रहे थे कि अचानक सभा में सन्नाटा छा गया जब एक पत्रकार ने निर्देशक से इसी फ़िल्म में कार्य कर रही अभिनेत्री के कास्टिंग काउच प्रकरण मामलें में पिछले महीने उन्हें कोर्ट कचहरी के दर्शन कराने के बाद उसका केस को वापस लेना , कहीं उस नवोदित अभिनेत्री को यह रोल इनाम के तौर पर तो नहीं दिया गया ? प्रश्न पूछना ।

तभी अभिनेत्री ने माइक अपने हाथ में लिया और उलटे मीडिया के ऊपर सिर्फ टीआरपी के लिये घटना को तोड़ मरोड़ कर उसे पेश करने का दोषारोपण करते हुए कहा ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था उनके साथ और डाइरेक्टर साहब उनके लिए पिता तुल्य पथ प्रदर्शक है और वह हमेशा उनके साथ काम करना चाहेंगी ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित
लखनऊ । उ०प्र०
01/03/2015


Wednesday, 25 February 2015

लघुकथा :-  धर्मांतरण
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ग्रामीणअंचल में आज बड़ी भीड़ जमा है । शायद कोई जादूगर आज चमत्कार दिखा रहा है। मुझे भी कुतूहल हुआ और मैं भी भीड़ को चीरते हुए ठीक सामने जा खड़ा हुआ देखा तो एक पादरी एक हाथ में मिट्टी के हनुमान की मूर्ति और दूसरे हाथ में लकड़ी का क्रास और सामने पानी से लबालब टब एक बड़ी सी मेज पर रखा है ।

पादरी बोला "गाँव वालों तुम्हारा भगवान अधर्मी है , झूठा है ,दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गई और तुम जहाँ पहले थे वही आज भी हो ।" "देखो तुम्हारे हनुमान जी अब स्नान करेंगे " कह कर उसने मूर्ति को टब में डाला थोड़ी देर में मिट्टी गल गई और हनुमान जी डूब गये । थोड़ी देर बाद उसने लकड़ी के क्रॉस को पानी में डाला और क्रॉस तैरने लगा। देखा गाँव वालों तुम्हारे आराध्य जिनकी तुम पूजा करते हो डूब गए और हम सबके प्रभु यीशु देखो तैर रहें हैं । आओ प्रभु यीशु की शरण में आओ उनका नाम ले कर तुम सबका इस पवित्र पानी से बपतिस्मा करता हूँ ।
दूर खड़ा एक विज्ञान का विद्यार्थी अपने अध्यापक के साथ इस तमाशे का मजा ले रहा था । वह टब के पास पहुंचा और उसने सलीब को सीधा खड़ा कर पानी में डाल दिया । 
गाँव वाले चिल्लयाये अरे ! पादरी के भगवान भी डूब गए ।
अरे मूर्खो किसी के भगवान नहीं डूबे तुम लोंगो की अक्ल में पत्थर पड़े हुयें हैं वे डूबे हैं । यह कोई चमत्कार नहीं विज्ञान है । पास में खड़े कालेज के मास्टर साहब गाँव वालों को फटकार रहे थे ।
पादरी ने चुपचाप खिसकने में अपनी भलाई समझी । धरमान्तरण यहाँ ना सही चलो कहीं और सही ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
25/02/2015



Tuesday, 24 February 2015

लघुकथा :- त्रिकोणीय प्रेम
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मात्र उन्नीस बरस की है रोशनी, कालेज जाती है । यह उम्र ही ऐसी होती है कि कक्षा में पड़ने वाला हर नवयुवक और युवतियाँ भावनाओं में बह कर अचानक ही एक दूसरे के प्रति आकर्षित हो कर दोस्ती कर लेते और अपना अलग ग्रुप बना लेते हैं । जो अक्सर कालेज की कैंटीन हो या फिर सिनेमा घर या शॉपिंग मॉल साथ बैठे मिलते हैं ।

राघव और संजीव भी रोशनी के साथ पढ़ते थे और तीनों ही अच्छे दोस्त थे । रोशनी अपनी हर छोटी और बड़ी बातें आपस मे इनसे साझा किया करती थी ।
आज कालेज का आखिरी दिन है। अचानक राघव की नजर कैंटीन के बाहर बरगद के पेड़ के नीचे रोशनी का हाथ पकड़े संजीव पर पड़ी । मानो उसके तनबदन में आग लग गई हो और वहअनजान बन वहाँ से चला गया ।
कुछ दिनों बाद उसने बातों बातों में संजीव से रोशनी और उनके बीच पनपते हुए प्यार के बारे में पूछा । जिसको संजीव ने मजाक में लेते हुए हाँ कह दिया ।
कुछ हफ्तों बाद राघव का संजीव के पास फ़ोन जाता है कि उसकी कार किसी सुनसान जगह पर खराब हो गई है । अगर वह अपनी गाड़ी ले आये तो उसकी बड़ी मदद होगी । सारी रात संजीव घर से गायब था उसके घर वालों को चिंता हुई तो थाने जाकर रपट लिखवा दी ।
आज सुबह सुबह रोशनी अपनी माँ को डॉक्टर को दिखलाने हस्पताल ले जा रही थी कि तभी सामने से एक बाइक वाले ने जिसने काला हेलमेट पहना हुआ था । रिक्शे के सामने अपनी गाड़ी को खड़ा किया तरल पदार्थ रोशनी के चेहरे पर फेंका और वहाँ से भाग खड़ा हुआ ।
कुछ दिनों बाद पुलिस ने राघव को धर दबोचा उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था ।
पर क्या संजीव वापस आ सकता है ? क्या रोशनी का खूबसूरत चेहरा उसके जुर्म को कबूलने से वापस पहले जैसा हो सकता है ?
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
25/02/2015


Monday, 23 February 2015



 लघुकथा :- इंटरनेट का नशा
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जब तुम्हे अपने लैपटॉप से चिपके रहना था तो शादी क्यों कीअनीता ने छूटते मुँह मोहित से सवाल किया ।
अरे मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ , इंटेरनेट पर कोई गेम नहीं खेलता हूँ । वेब डिजाइनिंग मेरा पेशा है और अगर मैं काम नहीं करूँगा तो इतना आलिशान घर और दाना पानी कहाँ से आएगा ? " मैं भले ही छोटे शहर से आई हूँ , परंतु मूर्ख नहीं हूँ । "अनीता ने मुँह फुलाते हुए बोली आपको दिन भर जो करना है करें आज से रात को ऑफिस बंद ।
पर कंपनी का हेड ऑफिस तो अमरीका है और उनका दिन तो हमारी रात होगी और काम के सिलसिले में तो उनसे इंटरनेट पर चैटिग भी करनी पड़ती है और दिन भर की रिपोर्ट भी तो देनी होती है । ऊपर से सारे क्लाइंट भी मेरे विदेशी हैं । 
अनीता समझो इसे कि तुम्हारी शादी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से हुई है ना कि किसी क्लर्क से जो सुबह 10 से 5 बजे तक की ड्यूटी करता है और झोला लटकाये शाम को घर चला आता हो ।
मुझे कोई नशा नहीं है इंटरनेट का यह मेरा जॉब है 

(पंकज जोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
24/02/2015


Saturday, 21 February 2015

लघुकथा :- कुँवारी  माँ
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रमा का इस दुनिया में कोई नहीं था , माँ-बाप छोटी उम्र में ही स्वर्ग सिधार गये थे। एकाकी जीवन काटे ना कटता, घर जाकर इतनी जल्दी क्या करुँगी ?

ऑफिस से छूट कर वह पास के ही पार्क की बेंच पर बैठी सोच ही रही थी कि तभी एक बच्चे के करुण शब्दों को सुनकर उसकी तन्द्रा टूटी " बीबी जी एक रुपया दे दो , दो दिन से कुछ नहीं खाया है "
पलट कर देखती है तो गोल मटोल खूबसूरत गोरा चिट्टा बच्चा उसकी साड़ी के पल्लू को खींच कर भीख मांग रहा था ।
उसने बच्चे के नन्हे हाथों को पकड़ अपने पास बैंच पर बैठाया और पर्स से चॉकलेट निकाल उसका रेपर खोल बच्चे को खाने को दी और उसे खाता देख मन ही मन प्रसन्न हो रही थी ।
तुम कहाँ से आये हो , तुम्हारे माता-पिता का क्या नाम है ? बच्चा चॉकलेट छोड़ रुआंसे मन से उसका चेहरा देखने लगा। रमा को समझते देर नहीं लगी कि वह भी उसी की तरह अनाथ है ।
पढ़ोगे , स्कूल जाओगे और बच्चों की तरह मासूम चुपचाप चॉकलेट खाता रहा । केवल सिर हिला कर हामी भर दी ।
मेरे साथ घर चलोगे बच्चे के आँखें ख़ुशी से चमक उठी। ठीक है तो फिर आज से मैं तुम्हारी माँ हूँ ।

मुझे माँ कहोगे ना.........कह कर उसने बच्चे को गले से लगा लिया

(पंकज जोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
21/02/2015


लघुकथा :- ईर्ष्या
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" ईर्ष्या किसी और का बुरा करे या ना करे पर इससे ग्रसित व्यक्ति अपना तो बुरा करता ही है साथ में इसका वायरस व्यक्ति के पूरे परिवार को खा जाता है । यह एक लाइलाज बीमारी है और इसका निराकरण , निवारण भी आपको ही करना है । मन में पनपने से पहले ही इसको आपने रोक देना है ।"

आनंद सपरिवार स्वामी जी का प्रवचन सुन भावविभोर हो रहा था , धन्य हो गया उसका जीवन प्रसाद ग्रहण कर अपने घर की ओर चल दिया ।
अगले दिन अखबार के प्रथम पृष्ठ पर खबर पढते ही मुँह अवाक खुला का खुला ही रह गया ।
फलां फलां स्वामी जी के सत्संग के चढ़ावे के बटवारें को लेकर आयोजक और शिष्यों के बीच सर फ़ुटवल्ल । दोनों पक्षों के आधा दर्जन लोग घायल ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
21/02/2015
लघुकथा:-  गृहशोभा 
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जब वह पैदा हुआ तो बाप को समझ नहीं आया कि थाली पिटवाये या नहीं खैर उस समय वक़्त की नज़ाकत देख लड़का बोल कर थाली तो पिटवा दी ।

कुछ हफ्तों बाद उसने गाँव की सारी जमीन बेच रिश्तेदारों से शहर में अच्छी नौकरी का बहाना बना कर शहर चला आया । पति व पत्नी को समझ में नहीं आ रहा था कि इस नवजात शिशु को लड़का कहें या लड़की ।
एक बार तो वह उसको नदी में प्रवाहित करने जा रहा था तभी उसकी अंतरात्मा ने उसको झकझोरा मूर्ख ईश्वर के अंश को मार रहा है , यह तो कृपा है उसकी
वह उसको घर ले आया और लालन पालन करने लगा । जैसे जैसे समय व्यतीत होने लगा बालक के शारीरिक अंगो का विकास होने लगा। बढ़ते अंगो के विकास के प्रति बालक की जिज्ञासा व उसकी मनो दशा माता पिता से अधिक देर तक छिपी ना रही और उसके हाव भाव , बोलचाल के कारण आधुनिक चिकित्सा विकास के चलते उसे पूर्ण लड़की का स्वरुप दे दिया । आज वही लड़की किसी के घर की लक्ष्मी हैगृहशोभा है ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित
लखनऊ । उ०प्र०
21/02/2015


Thursday, 19 February 2015

लघु कथा :-  धोखा 
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विधवा सरिता जो की एक रईस घराने से थी,समाज में उनकी बहुत मान प्रतिष्ठा थी , अचानक उन्होंने अपनी कंपनी में काम करने वाले एक मामूली क्लर्क रोशन ,जो कि उनके लड़के अमित की उम्र का होगा या उससे दो चार साल बड़ा , के साथ गुपचुप तरीके से शादी करके सबको चौंका दिया ।

मामूली क्लर्क अब रोशन सेठ बन चुका था । इतनी जल्दी उसके भाग्य फिरेंगे यह तो स्वयं उसकी परिकल्पना शक्ति के परे की बात थी ।

शादी के कुछ ही महीने के भीतर बड़े रहस्यमयी ढंग से सरिता की मौत हो जाती है ।


अमित को माँ के गुज़र जाने के बाद अकेलेपन का अहसास ना हो इसलिये संभावना उसके साथ ही रहने लगी थी । एक दिन अमित को बिजनेस के सिलसिले में बाहर जाना पड़ता है । काम खत्म कर वह संभावना से मिलने की तड़प में जल्दी घर लौट आता है ।
घर पर उसको रोशन के कमरे से संभावना के हँसने की आवाज सुनाई पड़ती है और वह दबे पाँव रोशन के कमरे के अधखुले दरवाजे से जो देखता है .................उससे वह बुरी तरह टूट जाता है ।
अपने कमरे की अलमारी खोल उससे कुछ निकालता है और अंदर से कमरा बंद कर लेता है । कुछ मिनट बाद उसके कमरे से धाँय की आवाज आती है ।

दरवाजे से उसका खून रिस कर बाहर बह रहा होता है । सम्भावना के क़दमों तले ।

(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
19/02/2015
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लघुकथा :- अस्तित्व
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बचपन से ही माँ की तबियत खराब होने के कारण बूढ़े दादा-दादी , पिता व भाइयों की सेवा और बड़े होंने पर शादी और शादी के बाद ससुराल की जिम्मेदारियों ने अकस्मात ही सिमरन के चेहरे पर झुर्रियाँ ला दी थी ।

वह आगे पढ़ना चाहती थी पर सास ससुर के रूढ़ि वादी विचारों के आगे वह नतमस्तक हो गयी थी ।
आज उसके बच्चे बड़े हो चुके हैं और सब ठीक- ठाक अपनी-अपनी गृहस्थी में रमे हुयें हैं ।
सिमरन ने आज बी०ए० में दाखिला ले लिया है । और इस बार उसके पति भी साथ हैं अपनी पत्नी के अस्तित्व की खातिर ।

( पंकज जोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
19/02/2015
लघुकथा :- गांधीगिरी
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कुछ लोग बचपन से ही दबंग होते हैं और उनकी दबंगई और हड़काने से पूरा महकमा ही हिल जाया करता है ऐसे ही थे श्री उमा नाथ मिश्र जी । और उनके उलट हैं उनके सुपुत्र यानी देवेन्द्र बाबू ,जिन्होंने गलती से चोरी छुपे दो-तीन धार्मिक फिल्मे जागृति और दोस्ती ,मदर इण्डिया क्या देख लीं कि तब से ही उनको ग़ांधी गिरी का चस्का चढ़ गया था । चाहे घर हो ,मोहल्ला हो या दफ्तर सभी जगह वह सविनय अवज्ञा आंदोलन का ही सहारा लेते। और बड़े बड़े मसलों को हल करने में उन्हे सफलता भी प्राप्त हुई ।

चार गुंडों ने सरेआम उनकी लड़की की इज्जत तार तार कर दी ......और देवेन्द्र बाबू आज भी थाने पर धरना दिये बैठें हैं इस मुगालते मे कि शायद अब उन्हें इन्साफ मिलेगा। ना जाने कितने थानेदार आये और चले गये । परन्तु प्रथम साक्ष्य रिपोर्ट की फाइल है कि अपनी उसी जगह पर है जो टस से मस ही नहीं हो रही।
आज भी वे गुंडे खुलेआम ना जाने कितनी ही लड़कियों की अस्मत से खेलते फिर रहे हैं ।
और देवेन्द्र बाबू दरोग़ाओं को गुलाब के फ़ूल भेंट करने में व्यस्त हैं । लगे रहो .....
(पंकज जोशी)  सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
18/02/2015



Tuesday, 17 February 2015

लघु कथा :- पुनर्जन्म
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डाक्टरों की लापरवाही से सवा महीने का राजू कोमा में चला गया था। पीठ पर मीजल्स के दाने को एक मामूली दाना समझ उसका इलाज कर रहे तीन डॉक्टरों की कालेज के प्रिंसिपल द्वारा एम् डी रोक दी गई। अब बचने की कोई आशा नहीं है बच्चे को मनेन्जाइट्स और इंसिफिलाइटिस दोनों है । प्रिसिपल द्वारा नियुक्त डॉक्टरों के नए पैनेल ने अपनी राय मरीज बालक के माँ-बाप को बताई । " हम तो अपना कार्य कर ही रहें हैं अब सब कुछ भगवान के हाथों में है वही रक्षा कर सकतेहैं। "

तभी किसी ने कहा कि अगर चौक की काली जी के मंदिर का जल बालक की पलकों में लगाएं तो बालक जल्द ठीक हो सकता है । बस फिर क्या था बालक के माता-पिता काली जी के मंदिर जाकर रोज मत्था टेकते और माँ को चढ़ाये जल को बालक की पलकों में लगाते । माँ काली कभी अपने सच्चे भक्तों को निराश नहीं करतीं है। ठीक चौबीस दिन बाद बालक ने अपनी आँखे खोल दी । और धीरे-धीरे सबको पहचानने लगा । मेडिकल हिस्ट्री में यह एक रिकार्ड दर्ज हो गया था प्रिंसिपल साहब को खुद पर विश्वास नहीं हो रहा था जहाँ दवाइयाँ असर ना की वहां माता-पिता की दुआएँ काम कर गईं ।
मौत की आगोश में पड़ा मूर्छित बालक का पुनर्जन्म हो चुका था ।

(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
17/02/2015


Monday, 16 February 2015

लघुकथा - सरोगेट मदर
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वैशाली और आनंद की शादी को कई साल होने को आयें हैं पर आज तक उन्हें ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं हुई।
आनंद एक बड़ी कंपनी में सीईओ है । उसकी सेक्रेटरी , जिसके लाल टमाटर जैसे गाल ऊपर से खूबसूरत जिस्म , कम्पनी की तरफ से क्लाइंट के लिए सारी पार्टियों का संचालन सब कुछ उसके द्वारा होता है ।
आनंद जब भी टूर पर जाता तो एनी भी उसके साथ जाती । वह अपने को एक बेहतर सेक्रेटरी ,और बेहतर सेल्स गर्ल पहले ही साबित कर चुकी थी ।

उसी की बदौलत कंपनी को सारे टेंडर मिलते हैं
एक बार टूर पर कुछ ऐसा हुआ ........कि कभी खिन्न रहने वाला आनंद अब प्रसन्न रहने लगा है ।

हर वीकेंड पर वैशाली को घुमाना और महंगे गिफ्ट देना अब उसकी आदत मे शुमार हो चुका है । वैशाली भी उसके परवर्तित रुप से खुश है ।
बहाने से एक दिन वह वैशाली को अपने परिचय की डा०मित्र के घर ले गया और बातों ही बातों में सरोगेट मदर का विषय आनंद ने उठा दिया। जब डाक्टर ने वैशाली को इसके बारें में विस्तारपूर्वक समझाया तो वह तैयार हो गई और उसने इसके लिये अपनी स्वीकृति दे दी ।
अगले दिन डाक्टरनी की क्लिनिक में आनंद , वैशाली और दामिनी ( ऐनी का बदला हुआ नाम ) सरोगेसि के लिए मौजूद थे ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित

लखनऊ । उ०प्र०
16/02/2015



Sunday, 15 February 2015

चित्र कथा :- अधूरा प्रेम
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बहुत पुरानी बात है , जंगल मे युगल पक्षी जोड़ा रहता था , जिनकी हाल ही मे दोस्ती हुई और प्रेमसूत्र में बंध गये ।

बड़े बरगद के पेड़ को चुन दोनों ने उसमें अपना आशियाना बनाने की ठानी। और एक आरामदायक घोंसला अपने लिए तैयार किया ।
सब ठीक चल रहा था । तभी जंगल मे कुछ बहेलिये आये उन्होंने अपने हाथों मे जाल पकड़ा हुआ था। चिड़े ने उनकी बातें सुन ली कि वह उन दोनों को पकड़ने के लिये आयें हैं । एक रात जब चिड़ी सो गई तो चिड़े ने पेड़ से कूद कर स्वयं को जाल मे फंसा लिया ।तड़के ही पक्षी को फंसा देख बहेलिये वहां से चले गए ।
जब सुबह चिड़ी की आँख खुली तो उसने चिड़े को घोसलें मे नहीं पाया और उसने खाना पीना त्याग चिड़े के वापस लौटने का इंतज़ार करने लगी । पर चिड़ा को वापस ना आता देख कुछ दिनों के पश्चात उसको बेवफा मान चिड़ी ने उसके वियोग मे अपने प्राण त्याग दिए ।
एक दिन चिड़ा बहेलिये की कैद से छूट सीधे अपने आशियाने पहुंचा तो पाया कि चिड़ी तो मरी पड़ी है ।
चिड़ा आज भी उदास जोर जोर से वन देवी से पूछ रहा है , यह कैसी नियति है , किसकी गलती है चिड़े की जिसने वफ़ा की, या जुल्मी बहेलिये की जिसने उनके लिए जाल बिछाया था या चिड़ी की जिसको अपने प्रेमी के ऊपर भरोसा नहीं था ।

(पंकज जोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित 
लखनऊ । उ०प्र०
15/02/2015


Saturday, 14 February 2015

लघुकथा:-गुरुकुल
---------------------------------------अरे यह क्या बच्चे क्यों इस तरह खुले स्थान पर पढ़ाई कर रहें हैं । स्कूल की बिल्डिंग कहाँ गई और शिक्षक कहाँ हैं ? शिक्षा मंत्री ने बी०एस०ए० से छूटते मुँह सवाल किया । मंत्री जी के औचक निरीक्षण ने कई सारे सवाल खड़े कर दिये । अपने गाँव में बच्चों की निःशुल्क शिक्षा हेतु कुछ ही वर्ष पूर्व उन्होंने विद्यालय की नींव रखी थी । मंत्री जी के अपने ही गाँव में ऐसा जबरदस्त घोटाला जिस प्राथमिक विद्यालय के लिये बड़े पैमाने पर शिक्षा मित्रों की भर्तियां की गई थी उनको आत्ममंथन करने के लिये मजबूर कर दिया कि चुनाव में हुआ खर्चा , नादान परिंदों के भाग्य से खिलवाड़ करके ,ऐसे वसूला जायेगा ।

(पंकजजोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
14/02/2015

Friday, 13 February 2015

लघु कथा :- प्यार  से  रिटायरमेंट
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मेघना की नौकरी सचिवालय में , उसके पिता की मृत्यु के बाद, छोटी सी उम्र में ही लग गई थी ।
चार भाई बहनों में सबसे बड़ी होने के कारण परिवार का सारा बोझ उसके कन्धों पर ही आ टिका था। पहले भाई बहनों को लिखाया पढ़ाया फिर उनकी शादियां करवाई । खुद के शरीर को सजाने सवांरने का वक़्त ही कहाँ था उसके पास। ना ही कभी किसी भौजाई या बहन ने कभी सोचा कि जिज्जी ने हमारे लिये इतना त्याग किया है तो अब हमारा भी फर्ज बनता है उनकी गृहस्थी बसाने का पर नहीं सब अपनी ही रंगीन दुनिया मे मस्त थे।
"आखिर अंडे देने वाली मुर्गी को कौन छोड़ना चाहेगा ।"
समय परिस्थिति,देशकाल व वातावरण मे हर किसी के दिल के अरमां दिल मे ही दफ़न हो जाते हैं ।
विवेक भी उनमें से एक था । जो उसके साथ ही नौकरी करता था कई बार उसने मेघना को अपने दिल की बात कहने की कोशिश की पर मेघना हर बार उसका हाथ पकड़ कर उसके मुँह को सिल देती कि उसके ऊपर अभी बहुत जिम्मेदारियाँ हैं ।
आज मेघना के रिटायरमेंट का दिन है साथ ही साथ उसका विवेक के प्यार से भी रिटायरमेंट हो जायेगा ।
(पंकज जोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
13/02/2015


Thursday, 12 February 2015

लघुकथा :- बाँझ पन
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एक-एक पल, तिल-तिल कर जीवन जीना उसका दूभर हो गया था। शादी के इतने साल बीतने के बाद भी उसकी कोख सूनी व उजाड़ थी । बिना बच्चों की किलकारी के पूरा घर उसे काटने को आता था ।

ऊपर से सास ननद के तानें व मोहल्ले की स्त्रियों का उसे शक की नज़रों से देखना -कि वह एक बाँझ है ।

अच्छी भली लड़की को उसके ससुराल वालों ने पागल घोषित कर उसे पागलखाने में डाल दिया ।
क्या कभी किसी ने उसके दर्द पर मरहम लगाने की कोशिश की ? क्या कभी किसी ने उसके दर्द को जानना चाहा कि एक मर्द के रहते हुये वह क्यों बाँझ है ?
समाज के सामने तो वह दोनो एक पति पत्नी रहे ।

पर क्या भगवान के सामने भी वे पति पत्नी थे। अगर भगवान के सामने दोनों एक दूसरे के प्रति प्रेम व आस्था रखते तो आज उसकी गोद यूँ सूनी नहीं होती ।
आज पागल खाने के कमरे के कोने में पड़ी एक जिन्दा लाश जो कभी पूर्णतः स्वस्थ थी आँखों के कोरों से झरते उसके आंसुओं की अविरल धारा बेदर्द बेशर्म समाज से मानो पूछना चाह रही हो क्या उसका कुरूप होना एक अभिशाप है ।
(पंकज जोशी)
लखनऊ । उ०प्र०
12/02/2015


Wednesday, 11 February 2015

लघुकथा :- समलैंगिक
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वे दोनों अपने रूखे मिजाज एवं अड़ियल रवैये के कारण समाज से बहिस्कृत थीं या यूँ कहिये कि उन्होंने स्वयं ही समाज का बहिस्कार कर दिया था ।

दोनों ही पुरुष प्रेम में छली गई मानो उनका अस्तित्व एक खिलौने के मानिंद हो । दोनों अलग अलग सामाजिक परिवेश से आईं थीं ।
अपना घर बार नाते रिश्तेदारी सब कुछ त्याग कर अरुणिमा व संध्या मॉडलिंग में अपना कैरियर बनाने की खातिर माया नगरी चली आईं थी ।
दोनों की मुलाक़ात एक फोटोशूट के दौरान हुई फिर साथ साथ उन्होंने कई कंपनीयों के लिये मॉडलिंग भी की ।
दोनों ने एक दूसरे के भीतर अपना अक्स व अपने गुणों को देखा।धीरे धीरे दोनों की मित्रता प्रगाढ़ होते चली गई और जब भी समय मिलता तो दोनों कभी बांद्रा तो कभी जुहू चौपाटी ,तो कभी खंडाला घूमने निकल पड़ते ।
कुछ दिनों बाद संध्या अपना फ्लैट छोड़ कर अरुणिमा के घर रहने चली आती हैं । अब दोनों एक ही छत के नीचे रहते एक ही साथ कंपनियों के लिए मॉडलिंग करते व साथ साथ घूमते फिरते ।
यह बात उनके साथियों व कंपाउंड में रहने वाले स्त्री व पुरुषों की समझ के परे थी । लोग उनके पीछे फुसफुसाते "अरे वे दोनों तो समलैंगिक है ।"
(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
11/02/2015


Tuesday, 10 February 2015

लघुकथा :- एकलव्य 
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इस वर्ष की इंटर यूनिवर्सिटी के खेलों में फुटबॉल में शील्ड श्यामू की बदौलत मिली थी । सुबह से उसके कोच परेशान इधर से उधर अनमने ढंग से चहल कदमी कर रहे थे ।

कैसे कहूँ श्यामू से कैसे कहूँ..... 

शाम को प्रेक्टिस के वक़्त उन्होंने श्यामू को किनारे बुलाया और कहा ...श्यामू तुम एक बेहतरीन फुटबॉलर हो और यह मैं नहीं तुम्हारा खेल बोलता है। स्टेट टीम के चुनाव का समय आ गया है ।

मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ । बोलिये गुरूजी क्या कहना चाह रहें है आप ? कुछ नहीं मंत्री जी का फोन आया था वे चाहते हैं कि टीम को चुनते वक़्त मैं उनके लड़के रवि को तुम्हारी जगह टीम मे लूँ । तो मैं तुम्हारी राय ......कहते कहते चुप हो गये ।
गुरु जी जैसा आप उचित समझे अनमने ढंग से रवि ने अपना किट उठाया साईकिल मे बाँधा और घर की ओर निकल पड़ा ।
उसी रात एकलव्य कोच साहब के सपने में आता है । " यह क्या गुरु जी आप भी गुरु द्रोणाचार्य की तरह एक उभरती प्रतिभा को सिर्फ इसलिए समाप्त कर देंगे कि वह मंत्री का बेटा है , क्या खेल व शिक्षा सिर्फ राजाओं के बच्चों के लिये हैं गरीबों का कोई अधिकार नहीं ? "
नहीं नहीं ऐसा कतई नहीं होगा एकलव्य तुम धन्य हो तुमने तो मेरी आँखे खोल दी" अचानक गुरु जी की आँख खुल जाती है , मन ही मन सोचते हैं क्या यह सपना था या सच्चाई ।
अगले दिन नोटिस बोर्ड में प्लेइंग इलेवन की टीम की लिस्ट चस्पा थी । श्यामू को टीम का कैप्टन बनाया गया और मंत्री जी के लड़के का नाम ......

(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
10/02/2015



Monday, 9 February 2015

लघुकथा :- उम्र दराज  प्रेमी
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इतनी उम्र हो गयी अम्मा बाबू जी को देखो तो मेरी उम्र की लड़की के साथ गुलछर्रे उड़ा रहें हैं क्या कहेंगे मेरे ससुराल वाले जब उनको बाबू जी की हरकतों के ........मैं तो सोच के ही शर्मिंदा हो रही हूँ ।

तभी दरवाजे पर से आवाज आई "कुछ नहीं सोचेंगे रौशनी दी "।
आप कौन हैं ? रोशनी ने छूटते मुंह सवाल दागा ।
जी मेरा नाम मेघा है और मैं बगल वाले कम्पाऊंड में रहती हूँ । और जैसे ये आपके पिता हैं वैसे ही यह मेरे लिये भी पिता तुल्य हैं , मैं बाहर से यहाँ जॉब करने आई हूँ। एक बार रास्ते में कुछ आवारा लड़कों ने मेरे साथ छेड़कानी की थी । बस तब से यह मुझे सुबह बस अड्डे छोड़ने व लेने जाते हैं बिलकुल एक पिता की तरह चूँकि आज मैं ऑफिस से जल्दी चली आई तो सोचा बाबू जी को बताते चलूँ वरना नाहक ही वह शाम को परेशान होंगे मुझे बस अड्डे पर ना देख कर। मेघा बोली चली जा रही थी और रोशनी चुपचाप सन्न सुनती जा रही हो मानो उसके मुँह मे दही जम गया हो ।

(पंकज जोशी) सर्वाधिकारसुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०
09/02/2015


Sunday, 8 February 2015

लघुकथा:- बैजू बावरा 
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नवीन को बचपन से ही संगीत के प्रति रुझान था ।और उसने इंटर पास करने के बाद अपनी संगीत साधना को पूरा करने के लिये संगीत विश्व विद्यालय में दाखिला ले लिया और शास्त्रीय संगीत का तन्मयता से रियाज करने लगा ।

कुछ दिनों में हरीश और अमिता जो उसके सहपाठी थे तीनों अच्छे दोस्त बन गये ।
दोस्ती कब दुश्मनी में बदल जाये यह कुछ कहा नहीं जा सकता। गले में बेहतरीन स्वर और ऊपर से अमिता की नवीन के साथ नजदीकियां हरीश को रास नहीं आ रहीं थी ।
रतन शाह जो हरीश के पिता व शहर की एक प्रतिष्ठित ड्रग कम्पनी के मालिक हैं उनकी कंपनी में नवीन के पिता फाइनेंस मैनजर है । हरीश को यह बात पता थी ।
ईर्ष्या संसार की सबसे खतरनाक वस्तु है । हरीश ने कुछ ऐसी चाल चली जिसके कारण उन्हें गबन के आरोप में जेल हो गई और कुछ ही महीनों बाद उन्होंने जिल्लत भरी जिंदगी से तंग आ कर जेल मे आत्महत्या कर ली ।
जब नवीन को यह बात पता चली तो उसने हरीश से बदला लेने की सोची । पर कलाकार का कोमल मन , दिन-महीने धीरे धीरे बीतने लगे और हरीश से बदला लेने की बात भी नवीन के जेहन से धूमिल होने लगी और वह तन्मयता से अपनी संगीत साधना में लग गया ।
पैसा इस दुनिया की सबसे ख़राब वस्तु है । और पिता के बाद उसकी प्रेयसी अमिता ने भी नवीन का साथ छोड़ हरीश से शादी कर ली ।
इत्तेफ़ाक़ से बरसों बाद अमिता और हरीश एक कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बन के पहुंचे वहाँ पर नवीन का भी गायन प्रोग्राम था । प्रोग्राम समाप्ति के बाद दोनों से नवीन की मुलाक़ात होती है और नवीन जो पिछली सारी बातें भूल चुका होता है अचानक उनको अपने सामने देख उसके तनबदन में आग लग जाती है ।
तभी एक हादसा होता है । ऑडिटोरियम में आग लग जाती है । और सभी लोग अपनी जान बचा कर भागतें हैं । नवीन भी बाहर भागता है तभी उसके कानों मे अमिता की बचाओ बचाओ की आवाज सुनाई पड़ती है और वह उन दोनों की जान बचाने वापस आ जाता है ।
काफी मशक्कत के बाद वह उनकी जान बचाने में सफल हो जाता है । परन्तु इस बचाव कार्य में उसका चेहरा और दोनों हाथ बुरी तरह से जल जातें हैं फलस्वरूप उसके दोनों हाथों की उंगलिया काटनी पड़ी ।
होश आने पर वह अपने सामने अमिता और हरीश को सामने खड़ा पाता है । जो अंदर ही अंदर पश्चाताप की अग्नि में जल रहे थे । पर नवीन ने तो उनको पहले माफ़ कर दिया था जब उसने इन दोनों की जान बचायी थी ।
जला चेहरा और कटी हुई ऊँगलियों को देखना किसी सदमे से कम नही था नवीन के लिये यह जानते हुए कि उसका कैरियर अब ख़त्म हो चुका है । 

डिस्चार्ज से ठीक एक दिन पहले वह चुपचाप बिना किसी को कुछ बताये चल पड़ता है अंजान सफर पर एक गुमनाम ज़िन्दगी बसर करने को ।

(पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित ।
लखनऊ । उ०प्र०

08/02/2015