Saturday, 30 May 2015

पहचान
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भी खूबसूरत कदकाठी का मालिक सुरेश गाँव से शहर की ओर चल पड़ा अपनी पहचान बनाने को I

कालेज में एड्मिशन के दौरान एक सहपाठिनी दामिनीसे उसकी मुलाक़ात हुई I “ जो कालेज में लड़कों के जज्बातों से खेलने के लिए मशहूर थी

 “ I एक तरफा प्यार का खेल की दिनों तक चलता रहा और एक दिन उसने उस नवयुवक को भरी क्लास में एक जोरदार तमाचा रसीद दिया प्यार और तुमसे कभी शक्ल देखी हैं तुमने

नश्तर से चुभते हुए उसके शब्दों ने अनायास ही कब उसके क़दमों को धुंआ उड़ाते और शराब के ग्लासों को हलक से उतारने वालों की जमात पर लाकर खड़ा कर दिया उसे पता ही नहीं चला I


आज सालों बाद उस लड़की ने अपने इंस्पेक्टर पति के सामने उसको ना सही उसकी लाश को तो पहचान दे ही गई थी ---लावारिस नशेड़ी कहीं का ....!
( पंकज जोशी ) 

लखनऊ I उ.प्र

सर्वाधिकार सुरक्षित I


Saturday, 2 May 2015

दोहन
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लकड़ हारे के कुल्हाड़े से बरबस चोट खाता हुआ एक पेड़ अपने जीवन के अंतिम श्वाशों को गिन रहा है ।

पेड़ के टूट कर गिरने पर चरमराहट की आवाज मानो चीत्कार कर रही है। " त्राहिमाम माँ , त्राहिमाम  माँ " धरती अपने  एक संतान  के प्रति , दूसरे संतान का  असंवेदनशीलता को बर्दास्त ना कर पा रही थी।

इधर इंसानो का वनसंपदा के प्रति बढ़ते हुए लालच ने धीरे धीरे सूखे व आकाल का रूप ले लिया। अब तो वन्य जीव जंतु भी त्राहिमाम् करने पर मजबूर हो गए।

प्रकृति माँ धरती की आँखो से निकले आँसूओ के सैलाब अब सुनामी का रूप लेने लगे ।


( पंकज जोशी) सर्वाधिकार सुरक्षित।
लखनऊ ।उ.प्र.
02/05/2015